हमारे देश में बहुत से लोग किडनी की समस्या से परेशान हैं, इसके पीछे खानपान, दिनचर्या समेत कई कारण हैं। साथ ही एक बड़ा कारण हाई बीपी भी है। ये ऐसी समस्या है, जो जब किडनी को पूरी तरह खराब कर देता है, तब पता चलता है। इसलिए आइए इसके बारे में सरल भाषा में समझते हैं।
हाई बीपी अपने आप में एक गंभीर समस्या है, और इसकी वजह से हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य में कई तरह के नकारात्मक बदलाव होते हैं। हाई बीपी एक ऐसी समस्या है जो हमारे शरीर को धीरे-धीरे खोखला करता है, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। इसी कड़ी में अगर ये बीमारी लंबे समय तक रहती है तो ये किडनी को भी डैमेज कर सकती है।
किडनी हमारे शरीर का एक प्राकृतिक फिल्टर है, जिसका मुख्य काम खून को साफ करना है और शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ व विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालना है। यह सारा काम किडनी के अंदर मौजूद नेफ्रॉन नामक लाखों सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं के माध्यम से होता है। जब लंबे समय तक हाई ब्लडप्रेशर बनी रहती है, तो यह किडनी के नेफ्रॉन्स और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
समय के साथ इस लगातार और तीव्र दबाव के कारण ये वाहिकाएं सख्त, संकुचित और कमजोर होने लगती हैं, जिससे किडनी अच्छे से काम नहीं कर पाता है। यही वजह है कि किडनी खून को अच्छे से साफ नहीं कर पाती, जिससे शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं और अंत में किडनी फेलियर का खतरा पैदा होता है।
रक्त वाहिकाओं का संकुचन
हाई ब्लड प्रेशर के कारण किडनी की बारीक रक्त वाहिकाएं लगातार तनाव में रहती हैं। इस तनाव के चलते, ये वाहिकाएं सख्त और संकुचित होने लगती हैं। जब वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं, तो किडनी तक पहुंचने वाले रक्त की मात्रा कम हो जाती है, जिससे उसे फिल्टर करने के लिए पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
फिल्टरिंग यूनिट (नेफ्रॉन) पर दबाव
किडनी की फिल्टरिंग यूनिट यानी नेफ्रॉन में रक्त का एक गुच्छा होता है, जिसे ग्लोमेरुलस कहते हैं। हाई बीपी इस ग्लोमेरुलस पर सीधा दबाव डालता है। लंबे समय तक इस दबाव में रहने से नेफ्रॉन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और अपनी छानने की क्षमता खो देते हैं। इसके कारण जरूरी प्रोटीन (जैसे एल्ब्यूमिन) पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है।

किडनी फेलियर का चक्र
जब किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कम हो जाती है, तो वह शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ और नमक को बाहर नहीं निकाल पाती। इससे शरीर में तरल पदार्थ जमा होता है, जो रक्तचाप को और बढ़ा देता है। यह एक खतरनाक चक्र शुरू करता है, जिसमें हाई बीपी किडनी को डैमेज करता है, और डैमेज हुई किडनी बीपी को और बढ़ाती है जिसकी वजह से अंत में किडनी पूरी तरह से खराब हो जाता है।

बचाव के लिए क्या करें?
किडनी को सुरक्षित रखने के लिए रक्तचाप को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से बीपी की जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह पर दवाएं समय पर लें। डाइट में नमक का सेवन सीमित करें, नियमित व्यायाम करें, और धूम्रपान व शराब से दूर रहें। पर्याप्त पानी पीकर शरीर को हाइड्रेटेड रखना भी जरूरी है। इसलिए अगर किसी को हाई बीपी की समस्या है तो ये सावधानियां जरूर बरतें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।



