पंजाब में डेढ़ माह पहले 40 से 45 रुपये प्रति किलो के रेट के हिसाब से चीनी मिल रही थी, लेकिन आज 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। सरकार ने जमाखोरी को लेकर कार्रवाई शुरू की है, लेकिन बावजूद इसके चीनी के दामों पर रोक नहीं लग रही है और आए दिन इसमें बढ़ोतरी जारी है।
पंजाब में एक तरफ गन्ने की पैदावार घटती जा रही है और दूसरी तरफ पिछले कुछ दिनों से चीनी के दामों में भी उछाल देखने को मिल रहा है। गन्ने की घटती खेती के कारण केंद्र और राज्य सरकार के फसल विविधीकरण के प्रयासों को भी झटका लगा है, जिससे आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। गन्ना विकास निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, सूबे में पिछले छह साल के अंदर गन्ने की पैदावार में औसत 7.74 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
सूबा सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास कर रही है, लेकिन बावजूद इसके सरकार को उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिल रहे हैं। हर साल ही गन्ने की पैदावार में गिरावट देखने को मिल रही है। प्रदेश में वर्ष 2020-21 के दौरान गन्ने की 74.9 लाख टन पैदावार हुई थी, जो 2021-22 में घटकर 71.3 लाख टन तक पहुंच गई। इसी तरह 2022-23 और 2023-24 के दौरान 75.1 लाख टन दर्ज की गई, लेकिन दोबारा इसमें गिरावट देखने को मिली और वर्ष 2024-25 के दौरान पैदावार गिरकर 72.8 लाख टन तक पहुंच गई। इसी तरह वर्ष 2025-26 के दौरान पिछले कुछ साल में सबसे कम 69.1 लाख टन पैदावार हुई है, जिसने सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है।
पिछले कुछ साल से गन्ने की फसल के क्षेत्र में भी कमी आई है। इससे आने वाले दिनों में चीनी के दामों पर और असर देखने को मिल सकता है। पिछले एक महीने के अंदर ही चीनी के दाम कई गुना बढ़ गए हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि सूबे के गन्ना किसानों को सरकार सबसे अधिक मूल्य देती रही है और आगे भी इसे जारी रखा जाएगा। राज्य सरकार गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्नत बीजों की आपूर्ति, सब्सिडी वाली कृषि मशीनरी, उर्वरक, खरपतवार और कीटनाशक, मिट्टी जांच की सुविधाएं, जागरूकता शिविर और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर काम कर रही है।
किसानों को समय पर मिले फसल का दाम
पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं कृषि विशेषज्ञ विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि पंजाब में किसानों द्वारा गन्ने की खेती से दूरी बनाने का सबसे प्रमुख कारण भुगतान में देरी होना है। इसके अलावा फसल की कटाई के लिए मजदूरों की भारी कमी और लागत का बढ़ना भी इसके बड़े कारण हैं। यही कारण है कि किसान धान और गेहूं जैसी फसलों का रुख कर रहे हैं। पहले ही सूबे में भूजल का स्तर कम हो रहा है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समय पर किसानों को फसल का दाम मिले।
चीनी की जमाखोरी पर भी सरकार की सख्ती
चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए पंजाब सरकार ने स्टॉक और बाजार में आपूर्ति की निगरानी सख्त कर दी है। अब कोई भी चीनी कारोबारी एक स्थान पर 4000 क्विंटल से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके अलावा खरीदी गई चीनी को 30 दिन से अधिक समय तक रखने पर भी रोक रहेगी। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लालचंद कटारूचक ने केंद्र सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए विभागीय अधिकारियों को चीनी की उपलब्धता, स्टॉक और बाजार में आपूर्ति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
लोगों के हितों को ध्यान में रखकर कर रहे काम : नवदीप जीदा
शूगरफेड के अध्यक्ष नवदीप जीदा ने कहा कि सरकारी चीनी मिल सिर्फ लोगों के हितों को ध्यान में रखकर चीनी बना रही हैं, जबकि निजी मिल वाले पैसे को तरजीह देकर एथेनॉल तैयार करने में जुट गए हैं, जिस कारण चीनी की कमी ज्यादा हो रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को भी एथेनॉल बनाने के लिए योजना भेजी थी कि 90 फीसदी इस काम के लिए केंद्र सरकार पैसा लगाएगी और राज्य सरकार 10 फीसदी पैसा लगाए।
राज्य सरकार ने पंजाब के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए चीनी बनाने को तरजीह देते हुए केंद्र सरकार की एथेनॉल प्लांट वाली योजना को सिरे से नकार दिया। नामधारी स्टोर संचालक सुरमुख सिंह ने बताया कि चीनी का रेट हर रोज बदल रहा है। एक से दो रुपये प्रति दिन बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक माह पहले 45 रुपये प्रति किलो रेट के हिसाब से चीनी मिलती थी, लेकिन आज 70 रुपये तक पहुंच गई है।
दुकानदार महेश ने कहा कि आए दिन बढ़ रहे चीनी के रेट को कम करने के लिए केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। निजी मिल वालों को केंद्र सरकार कड़े आदेश दे, जिससे चीनी आसानी से पहले की तरह कम रेट पर लोगों को मिल सके। दुकानदार ने बताया कि चीनी के रेट बढ़ने के कारण आम घरों की रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
एक महीने में करीब 35 फीसदी तक बढ़े दाम : कारोबारी राहुल अनेजा
कारोबारी राहुल अनेजा ने कहा कि अमृतसर के बाजार में करीब एक महीने पहले चीनी 46 से 48 रुपये किलो के बीच मिल रही थी। अगस्त के मध्य तक इसका भाव 54-56 रुपये किलो पहुंच गया और अब खुदरा बाजार में करीब 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है। चीनी महंगी होने से चाय-कॉफी से लेकर मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ सकती है। मिठाई कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि त्योहारी सीजन में उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ी मात्रा में चीनी की जरूरत पड़ती है।
महंगाई और बढ़ने की आशंका
किसान परमिंदर सिंह ने बताया कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी के दामों में इस तरह की बढ़ोतरी आम बात है, लेकिन मौजूदा समय में गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में हो रहा है, क्योंकि जितना गन्ना चीनी मिलों तक पहुंचना चाहिए था, वह नहीं पहुंच पाया और इसी कारण इसके दाम में बढ़ोतरी हुई है। किसान नेता बलविंदर सिंह ने कहा कि सावन माह में होने वाली बारिश और तेज हवाओं के कारण गन्ने की खेती भी खराब हो गई। इससे गन्ने की गुणवत्ता और बाद में चीनी के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
ब्रांडेड चीनी के दाम 70 रुपये से भी अधिक
प्रमुख रिटेल कारोबारी रमन अग्रवाल का कहना है कि चीनी की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। आज बाजार में रिटेल में चीनी के दाम क्वालिटी के हिसाब से 65 रुपये प्रति किलो से 70 रुपये प्रति किलो के दायरे में हैं, जबकि पैकिंग वाली ब्रांडेड चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर चल रहे हैं। इससे आम लोगों का बजट गड़बड़ा रहा है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के कारण मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और पेय पदार्थों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसी बीच महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम और कम बारिश से गन्ने की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
अब अधिक स्टॉक नहीं कर पाएंगे जमा, त्योहारी सीजन में होगी दिक्कत : मित्तल
जालंधर की चीनी व्यापारी रेहान मित्तल के अनुसार, केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत अब चीनी का अधिक स्टॉक जमा नहीं कर पाएंगे। डिमांड ज्यादा व सप्लाई कम होने के कारण भी चीनी के दाम में बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले त्योहारी सीजन में और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब की शुगर मिलें अब चीनी बनाने की जगह एथेनॉल बनाने पर ज्यादा जोर दे रही हैं। इसकी मुख्य वजह एथेनॉल से हो रहा मुनाफा है, जिस कारण भी चीनी के दामों पर असर पड़ रहा है।



