चुनाव आयोग ने एसआईआर वाले 17 राज्यों में ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब फॉर्म-6 और घोषणा पत्र अलग-अलग जमा करने होंगे तथा दोनों के लिए अलग ओटीपी सत्यापन और ई-साइन जरूरी होगा।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है। आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 और उसके साथ जमा होने वाले घोषणा पत्र को अब अलग-अलग कर दिया है। यह व्यवस्था एसआईआर प्रक्रिया वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड समेत 17 राज्यों में लागू होगी।
चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए कानूनी संरक्षण मिलने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। अदालत ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
अलग-अलग जमा करने होंगे दोनों दस्तावेज
नई व्यवस्था के तहत अब फॉर्म-6 और घोषणा पत्र अलग-अलग जमा करने होंगे। इसके लिए दोनों दस्तावेजों का अलग-अलग ओटीपी सत्यापन और ई-साइन अनिवार्य होगा। वहीं, जिन पुराने मतदाताओं के नाम एसआईआर की प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, वे भी अपना नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं।
मनोज झा और अरुण अग्रवाल की याचिकाओं पर आदेश
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजद सांसद मनोज झा और सामाजिक कार्यकर्ता अरुण अग्रवाल की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 के तहत चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में कानूनी संरक्षण दिया गया है।
गंभीर अपराधों में भी मुकदमा नहीं चलने का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिनियम की धारा 16 के तहत भ्रष्टाचार, जालसाजी और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में भी चुनाव आयुक्तों के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसी कानूनी संरक्षण को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।



