खरी बात: अमेठी की हार के बाद स्मृति ईरानी बोलीं- पैतृक सीट छोड़ भाजपा के गढ़ से लड़कर दिखाएं; किसे दी चुनौती?

खरी बात: अमेठी की हार के बाद स्मृति ईरानी बोलीं- पैतृक सीट छोड़ भाजपा के गढ़ से लड़कर दिखाएं; किसे दी चुनौती?

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की नवनियुक्त महामंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में 2024 की हार, राहुल गांधी और कांग्रेस पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है और जो लोग पैतृक या सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ते हैं, उन्हें वहां से चुनाव लड़ना चाहिए जहां उनकी कभी दाल नहीं गली। ईरानी ने भाजपा में महिलाओं की भूमिका, युवा राजनीति और अपने आगामी चुनाव को लेकर भी स्पष्ट जवाब दिया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की नवनियुक्त महामंत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि राजनीति को लेकर मेरा नजरिया थोड़ा अलग रहा है। ज्यादातर लोग राजनीति में सत्ता और पद पर बने रहने के लिए आते हैं, लेकिन मैंने भाजपा के साधारण कार्यकर्ता के रूप में वर्षों विपक्ष का दौर देखा है। 

प्रश्न- आपने हाल ही में भाजपा संगठन में महामंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। 2024 के नतीजों के बाद आप अचानक टीवी सीरियल की दुनिया में वापस कैसे लौट गईं?

उत्तर- पार्टी ने जब भी जो भी करने को कहा मैंने किया। कोई मूर्ख ही होगा जो कांग्रेस के गढ़ अमेठी में जाकर चुनाव लड़ने की सोचेगा, पार्टी ने मुझे वहां भेजा और मैंने चुनाव लड़ा। जहां तक टीवी पर लौटने की बात है तो मैंने करीब बीस साल टीवी का शिखर देखा, अपनी मेहनत से कमाने में कोई हर्ज नहीं है। यशवंत राव केलकर जी कहते थे कि सफलता के शिखर को छोड़कर राजनीति में आकर देश को कुछ देना चाहिए, मैंने उनके इस कथन को आत्मसात किया।

प्रश्न- आप जब अपनी पुरानी टीवी सीरियल की दुनिया में रम गईं तब क्या आपको उम्मीद थी कि पार्टी दोबारा आपको इतनी बड़ी जिम्मेदारी देगी?
उत्तर- 
पार्टी ने मुझे छोड़ा कहां था जो मेरी उम्मीद टूटती, मैं लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होती रही। क्योंकि आप जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनाव में हरा देते हैं, तो आपको लेकर विश्लेषण और टीका-टिप्पणी बहुत होती है।

प्रश्न-तो जिस अमेठी में आपने राहुल गांधी को हराया वहीं से जब हार मिली तो कैसा लगा?
उत्तर-
आपको अपने आपको इतना सीरियसली नहीं लेना चाहिए। आप संगठन का हिस्सा कुछ योगदान देने के लिए बनते हो। आप जब संगठन को योगदान देने के लायक नहीं बचते तो संगठन पर बोझ बन जाते हो और मैं अपने संगठन पर कभी बोझ नहीं बनना चाहती।

प्रश्न-एक समय भाजपा में प्रखर महिला नेताओं का बोलबाला था। सुषमा जी, सुमित्रा दी, उमा जी जैसे कई बड़े नाम थे। लेकिन इन दिनों यह एक कमी पार्टी में दिख रही।
उत्तर-
मेरी पार्टी शुरू से ही महिलाओं को प्रमुखता देती रही है। नरेंद्र मोदी ने 2014 की जीत के बाद सबसे पहले शौचालय बनाने को प्राथमिकता दी और 33 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुलवाए। चार करोड़ से ज्यादा पक्के घर बनाए गए, जिसमें घर का स्वामित्व महिला के नाम या संयुक्त रूप से दिया गया। मुद्रा लोन में 60 प्रतिशत महिलाएं आगे आईं और मोदी जी ने 33 फीसदी महिला आरक्षण संसद से पारित कराया।

प्रश्न- जिस अमेठी में आपने 2019 में राहुल गांधी को हराकर इतिहास बनाया वहां से 2024 में चुनाव कैसे हार गईं ? 
उत्तर- दरअसल गांधी परिवार तो अमेठी में चुनाव लड़ने आया ही नहीं, अगर भरोसा होता तो वायनाड की बजाय अमेठी से लड़ते। हार-जीत दोनों राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और शेखी वो बघारते हैं जो अपने पिता की पैतृक सीट या सेफ सीट से लड़ते हैं। मैं कहती हूं कि वहां से लड़कर देखो जहां तुम्हारी कभी दाल नहीं गली है। हम तब सिर पर कफन बांधकर अमेठी गए थे जब केंद्र में यूपीए और राज्य में मुलायम सिंह यादव के दल की सरकार थी।

प्रश्न-जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के बाद कहा जा रहा है कि देश का युवा
उत्तर- 
दो वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने युवा मंत्रालय के माध्यम से देश के 750 विश्वविद्यालयों में अनेक युवा गतिविधियां की हैं और एक करोड़ से ज्यादा नौजवान सीधे जुड़े। चर्चा तब होती है जब कोई जंतर मंतर पर खड़ा होकर प्रधानमंत्री को गाली देता है। देश में कई ऐसे तत्व हैं जो चाहते हैं कि देश अब आयु के आधार पर बंटे, हमारा दायित्व है कि हम ऐसा न होने दें।

प्रश्न- एक आखिरी सवाल क्या स्मृति ईरानी यूपी में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी।
उत्तर-
स्मृति ईरानी कौन सा चुनाव लड़ेगी, कहां से लड़ेगी, कब लड़ेगी या नहीं लड़ेगी यह सब पार्टी का विषय है।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *