डीजल निर्यात पर रोक लगा सकता है अमेरिका: ट्रंप ने किया समर्थन, दुनिया भर में बढ़ सकती है ईंधन की कीमतें

डीजल निर्यात पर रोक लगा सकता है अमेरिका: ट्रंप ने किया समर्थन, दुनिया भर में बढ़ सकती है ईंधन की कीमतें

अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल निर्यात पर पूरी या आंशिक रोक लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। अमेरिकी प्रशासन इस कदम के फायदे और नुकसान का आकलन कर रहा है।

अमेरिका में डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीजल के निर्यात पर रोक लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका में बड़ी मात्रा में डीजल का उत्पादन होता है और यदि इसका कुछ हिस्सा विदेश भेजने के बजाय घरेलू बाजार में रखा जाए तो अमेरिकी उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है। अमेरिका रोजाना करीब 13 लाख बैरल डीजल का निर्यात करता है, इसलिए निर्यात घटने पर घरेलू आपूर्ति बढ़ सकती है, लेकिन वैश्विक बाजार में डीजल की कमी से कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका भी है।

ट्रंप ने कब कही ये बात?
बीबीसी के अनुसार ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कहा कि उन्होंने पहले भी डीजल को विदेश भेजने के बजाय अमेरिका में रखने की बात कही है। उनके मुताबिक इससे पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ असर पड़ सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी पुष्टि की है कि प्रशासन इस बात का आकलन कर रहा है कि डीजल के निर्यात पर पूरी या आंशिक रोक लगाना संभव होगा या नहीं। हालांकि सरकार यह भी देख रही है कि ऐसे किसी कदम से अमेरिका की रिफाइनरियों के संचालन पर प्रतिकूल असर न पड़े।

अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर
अमेरिका में डीजल की कीमतों में तेज उछाल ने सरकार और सांसदों की चिंता बढ़ा दी है। एएए के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को देश में डीजल की औसत कीमत 6.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई। यह अब तक का नया रिकॉर्ड स्तर है।डीजल की कीमत बढ़ने का सीधा असर केवल निजी वाहनों पर नहीं पड़ता। ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और माल ढुलाई में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए डीजल महंगा होने पर सामान की परिवहन लागत भी बढ़ सकती है।अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने हैं। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई हैं। कई रिपब्लिकन सांसद प्रशासन पर घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाने का दबाव डाल रहे हैं।आयोवा से सीनेट चुनाव लड़ रहीं रिपब्लिकन सांसद एश्ले हिंसन ने कहा कि राज्य के उपभोक्ताओं पर पेट्रोल पंप पर बढ़ती कीमतों का दबाव पड़ रहा है। अलास्का के सीनेटर डैन सुलिवन ने भी अमेरिकी डीजल और उसके निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की है ताकि घरेलू भंडार को फिर से मजबूत किया जा सके।

रूस-यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाई मुश्किल
डीजल की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ता दबाव है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसके अलावा यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले तेज किए हैं। रूस दुनिया के बड़े डीजल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। उसकी रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने और मॉस्को की ओर से लगाए गए कुछ निर्यात प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ मुलाकात के दौरान रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेनी हमलों को रूस के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इन हमलों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

अमेरिका निर्यात रोकता है तो क्या होगा?
अमेरिका दुनिया के प्रमुख डीजल निर्यातकों में शामिल है। वह रोजाना करीब 13 लाख बैरल डीजल दूसरे देशों को भेजता है। यह उसके कुल रिफाइनिंग उत्पादन का लगभग एक चौथाई है।इसी वजह से अमेरिका अगर डीजल निर्यात पर पूरी या बड़ी आंशिक रोक लगाता है तो इसका असर केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रह सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध डीजल की मात्रा घट सकती है और इससे दूसरे देशों में आपूर्ति को लेकर दबाव बढ़ सकता है।ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देश अमेरिकी ईंधन आपूर्ति पर निर्भर रहे हैं। रूस से ऊर्जा आयात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद अमेरिकी ईंधन की भूमिका और महत्वपूर्ण हुई है।हालांकि निर्यात रोकने से अमेरिका में घरेलू आपूर्ति बढ़ सकती है, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि वैश्विक बाजार में अमेरिकी डीजल की उपलब्धता घटने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

पेट्रोल की कीमतों पर भी असर की उम्मीद
ट्रंप का कहना है कि डीजल को घरेलू बाजार में रखने से केवल डीजल की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि सामान्य पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ असर पड़ सकता है।लेकिन डीजल और पेट्रोल के बाजार पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। दोनों की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग क्षमता, क्षेत्रीय मांग, परिवहन लागत और आपूर्ति की स्थिति जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। इसलिए डीजल निर्यात रोकने से पेट्रोल की कीमत कितनी घटेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
अमेरिकी डीजल निर्यात पर रोक का भारत पर सीधा असर कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक तेल और डीजल बाजार में आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। यदि अमेरिकी निर्यात में बड़ी कमी आती है और अन्य आपूर्तिकर्ता उसकी भरपाई नहीं कर पाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से पेट्रोलियम आयात बिल, परिवहन लागत और अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।हालांकि भारत पर वास्तविक प्रभाव कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, घरेलू ईंधन मूल्य नीति और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल डीजल निर्यात पर अंतिम फैसला नहीं
फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने डीजल निर्यात पर रोक लगाने का अंतिम फैसला नहीं किया है। सरकार यह आकलन कर रही है कि पूरी या आंशिक रोक से घरेलू बाजार को कितना फायदा होगा और अमेरिकी रिफाइनिंग उद्योग तथा अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार पर इसका कितना असर पड़ेगा। इसलिए आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन का फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *