सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने, छात्रों की आवाज दबाने और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने नीट पेपर लीक, छात्र प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई, शिक्षा बजट में कटौती और एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए व्यापक शिक्षा सुधार की मांग की।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। ‘द हिंदू’ अखबार में प्रकाशित अपने लेख ‘एन एजुकेशन सिस्टम्स कोलैप्स, यंग इंडियाज ट्रॉमा’ में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जवाबदेही और शिक्षा सुधार की मांग करने वाले छात्रों को भविष्य का हकदार मानने के बजाय ‘देश का दुश्मन’ समझ रही है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर हैं, लेकिन सरकार उनके साहस का जवाब कायरता और क्रूरता से दे रही है।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता का लगाया आरोप
सोनिया गांधी ने आगे लिखा कि देश भर में परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में आ रही गिरावट के खिलाफ छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगें बहुत स्पष्ट हैं- सरकार अपनी जवाबदेही तय करे और शिक्षा में सुधार लाए। 20 जुलाई 2026 का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को दबाने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का हिंसक इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि इस हिंसा में कई निर्दोष छात्र घायल हुए। गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि पैलेट के इस्तेमाल को जरूर उनकी मंजूरी मिली होगी। उन्होंने कहा इस सरकार में हिंसा की यह पहली घटना नहीं है। 2020 में सीएए-एनआरसी प्रदर्शनों के दौरान भी पुलिस यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसी थी और महिला पहलवानों के साथ भी बदसलूकी की गई थी।
सरकारी शिक्षा के बजट में कटौती और निजीकरण
सोनिया गांधी ने शिक्षा संकट के पीछे तीन बड़े कारण बताए हैं-
- सरकारी शिक्षा से पीछे हटना: मोदी सरकार ने अपने कुल बजट में से स्कूल शिक्षा के हिस्से में 50 प्रतिशत और उच्च शिक्षा के हिस्से में 33 प्रतिशत की कटौती की है। पिछले 12 वर्षों में सरकार ने लगभग 1 लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिए, जबकि 43,000 निजी स्कूल खोले गए। इनमें से बड़े हिस्से का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठन करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के परिवार अकेले नीट (NEET) कोचिंग पर जितना पैसा खर्च करते हैं, उतना केंद्र सरकार कुल मिलाकर सरकारी शिक्षा पर भी निवेश नहीं करती।
- परीक्षा प्रणाली का ध्वस्त होना: उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका केंद्रीयकरण और निजीकरण कर दिया गया है। एनटीए में कर्मचारियों की कमी है और यह निजी ठेकेदारों के भरोसे चल रही है। इसमें विशेषज्ञों के नाम पर राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को रखा गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 12 वर्षों में देश भर में 152 पेपर लीक हुए, जिनमें से 9 पेपर लीक 2017 में बनी एनटीए के कार्यकाल में हुए हैं।
- रोजगार की कमी और जवाबदेही से भागना: पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के पास अच्छी नौकरियों के अवसर नहीं हैं। इसके बावजूद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसदीय समिति की सिफारिशों को खारिज कर दिया और इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।
सोनिया गांधी ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा- आज छात्रों के साथ खड़े होना और उनके भविष्य की रक्षा करना हमारा नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्य है।



