मार्वल की फिल्मों में ‘स्पाइडर मैन’ का किरदार हमेशा इसलिए खास रहा है क्योंकि उसके पीछे एक आम लड़के की कहानी होती है। अब 30 जुलाई को स्पाइडर मैन सीरीज की नई फिल्म ब्रांड न्यू डे रिलीज हुई है। पढ़िए रिव्यू और जानिए कैसी है यह फिल्म?
सुपरपावर होने के बावजूद पीटर पार्कर की परेशानियां किसी भी आम इंसान जैसी लगती हैं। ‘स्पाइडर मैन: ब्रांड न्यू डे’ भी इसी एहसास को आगे बढ़ाती है। इस बार फिल्म बड़े मल्टीवर्स सरप्राइज के बजाय पीटर पार्कर के स्ट्रगल और उसकी जिंदगी को पेश करने पर ज्यादा भरोसा करती है।

कहानी
‘नो वे होम’ की घटनाओं के चार साल बाद पीटर पार्कर (टॉम हॉलैंड) पूरी तरह अकेला पड़ चुका है। डॉक्टर स्ट्रेंज के स्पेल के बाद पूरी दुनिया उसे भूल चुकी है। एमजे और नेड भी अब उसे नहीं पहचानते हैं। पीटर न्यूयॉर्क के एक छोटे से अपार्टमेंट में अकेले रहता है और अपनी पूरी जिंदगी स्पाइडर-मैन बनकर लोगों की मदद करने में लगा देता है।
अपने करीबियों को सुरक्षित रखने के लिए वह खुद उनसे दूरी बनाए रखता है। इसी बीच न्यूयॉर्क पर एक नया खतरा मंडराने लगता है। मैक गार्गन उर्फ स्कॉर्पियन की वापसी होती है और हालात तब और मुश्किल हो जाते हैं, जब हल्क और पनिशर जैसे ताकतवर किरदार भी कहानी का हिस्सा बनते हैं।
लेकिन फिल्म सिर्फ सुपरहीरो की लड़ाई नहीं दिखाती बल्कि यह भी दिखाती है कि पीटर अब एक जिम्मेदार और आत्मनिर्भर इंसान बनने की कोशिश कर रहा है। पूरी कहानी इसी सफर को आगे बढ़ाती है।
एक्टिंग
टॉम हॉलैंड इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। इस बार उनका पीटर पार्कर का किरदार पहले से ज्यादा मैच्योर और अकेला नजर आता है। बिना ज्यादा डायलॉग बोले भी वह कई सीन्स में असर छोड़ जाते हैं।
जॉन बर्नथल का पनिशर कम स्क्रीन टाइम में भी छाप छोड़ता है। जेंडाया का रोल सीमित है, लेकिन उनके और टॉम के साथ वाले सीन्स कहानी को भावनात्मक मजबूती देते हैं।
जैकब बैटलन एक बार फिर नेड के किरदार में सहज लगते हैं। भले ही इस बार उनका रोल पहले जितना बड़ा नहीं है, लेकिन जब भी वह स्क्रीन पर आते हैं, पुरानी फिल्मों की दोस्ती, अपनापन फिर से महसूस होता है। सैडी सिंक अपने रहस्यमयी किरदार से उत्सुकता बनाए रखती हैं, जबकि मार्क रफेलो की मौजूदगी कहानी को नया डायरेक्शन देती है।
डायरेक्शन
निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन ने इस बार फिल्म को सिर्फ बड़े एक्शन और वीएफएक्स तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने पीटर पार्कर की इमोशनल जर्नी को भी बराबर जगह दी है। फिल्म की शुरुआत काफी मजबूत है और कहानी दर्शकों को बांधे रखती है।
तकनीकी तौर पर भी फिल्म अच्छी लगती है। वेब-स्विंगिंग सीक्वेंस रोमांच पैदा करते हैं। एक्शन की कोरियोग्राफी प्रभावशाली है और कई लड़ाई वाले सीन्स सिर्फ सीजीआई पर निर्भर नहीं लगते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी के मूड के साथ अच्छा तालमेल बनाता है।
हालांकि इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ जाती है। कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और क्लाइमैक्स उतना चौंकाता नहीं, जितनी कि उम्मीद थी।

क्या खटकता है?
करीब ढाई घंटे की फिल्म दूसरे हाफ में थोड़ी लंबी महसूस होने लगती है। कई विरोधी किरदार होने की वजह से कुछ किरदारों को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। क्लाइमैक्स में भी ऐसा बहुत कम होता है, जो आपको पूरी तरह चौंका दे। अगर एडिटिंग थोड़ी और कसी होती तो फिल्म का असर और बेहतर हो सकता था।
देखें या नहीं?
अगर आप ‘नो वे होम’ जैसा मल्टीवर्स वाला बड़ा तमाशा देखने की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो यह फिल्म वैसा अनुभव नहीं देती है। लेकिन अगर आपको स्पाइडर-मैन का इंसानी पक्ष पसंद है और आप टॉम हॉलैंड के इस किरदार से जुड़े हुए हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
फिल्म हर मामले में परफेक्ट नहीं लेकिन यह याद दिलाती है कि पीटर पार्कर की सबसे बड़ी ताकत उसकी सुपरपावर नहीं बल्कि उसका इंसानी जज्बा है। यही बात इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने लायक बनाती है।



