यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद दिल्ली के श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडियन मैनेजमेंट एंड रिसर्च (एसआरआईएसआईआईएम) के प्रबंधक स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को यूपी के आगरा से गिरफ़्तार कर लिया गया है.
दिल्ली पुलिस की टीम ने चैतन्यानंद को ताजगंज के एक होटल से देर रात गिरफ़्तार किया गया. ग़ौरतलब है कि दिल्ली का श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट एंड रिसर्च (एसआरआईएसआईआईएम) इन दिनों यौन उत्पीड़न की वजह से चर्चा में है. क़रीब दो महीने पहले कुछ छात्राओं ने स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. उन्हें पार्थ सारथी भी कहा जाता है और उस समय वे संस्थान के प्रबंधक थे.
स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर आरोप लगने के बाद श्रृंगेरी पीठ, पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने मामले पर संज्ञान लिया था. दिल्ली पुलिस के अनुसार अब तक 32 छात्राओं से पूछताछ की गई है. इनमें से 17 छात्राओं ने स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर यौन उत्पीड़न, अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने, डराने और जबरन छूने जैसे आरोप लगाए हैं.
दिल्ली के वसंत कुंज थाने में इस मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने एक कार भी ज़ब्त की है जिस पर फ़र्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी थी. यह कार स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती की बताई जा रही है.
आख़िर हुआ क्या था और कब?
एसआरआईएसआईआईएम ने 24 सितंबर 2025 को एक प्रेस नोट जारी किया, जिस पर कार्यकारी निदेशक रामास्वामी पार्थसारथी के हस्ताक्षर थे. इसमें स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर लगे आरोपों और संस्थान की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया गया.
प्रेस नोट में कहा गया कि जैसे ही कदाचार की जानकारी मिली, संस्थान और उसकी मुख्य संस्था श्री शारदा पीठम, श्रृंगेरी ने छात्रों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाए. इसके अलावा ऑडिट में धोखाधड़ी, जालसाजी, चीटिंग और आपराधिक विश्वासघात जैसी कई गड़बड़ियां सामने आईं.
इस आधार पर 19 जुलाई 2025 को आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई और इसके साथ 300 से अधिक पन्नों के सबूत सौंपे गए. इसी मामले में वसंत कुंज नॉर्थ थाने में एफआईआर नंबर 320/2025 दर्ज हुई. प्रेस रिलीज़ के मुताबिक बाद में 1 अगस्त 2025 को एक और शिकायत भी दी गई. इसी दौरान पीठम को यूनिवर्सिटी आउटरीच प्रोग्राम के डायरेक्टर का एक ईमेल मिला.
इसमें छात्राओं की शिकायतों का ज़िक्र था, जिनमें मनमाने फ़ैसले, बदले की कार्रवाई और देर रात भेजे गए अनुचित व्हाट्सऐप मैसेज शामिल थे. इसके बाद पीठम ने एक गवर्निंग काउंसिल का गठन किया. इस काउंसिल ने छात्रों से बातचीत और जानकारी जुटाने के लिए वर्चुअल मीटिंग की. 2 अगस्त 2025 को जारी एक पत्र में कहा गया कि मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है.
इसमें यह भी साफ किया गया कि स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती का श्रृंगेरी पीठम या उसकी संन्यासी परंपरा से कोई संबंध नहीं है. 4 अगस्त 2025 को पीठम के प्रशासक पीए मुरली ने एसएचओ को एक शिकायत की, इसमें उत्पीड़न और कदाचार का ज़िक्र था.
इसके आधार पर 5 अगस्त को एक और एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस ने छात्रों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की. दिल्ली पुलिस ने यह मामला बीएनएस की धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न), धारा 79 (महिला की मर्यादा का अपमान) और धारा 351(2) (धमकी) के तहत दर्ज किया है. स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती फिलहाल फ़रार थे और उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था.
9 अगस्त 2025 को जारी एक बयान में बताया गया कि स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को डायरेक्टर और मैनेजमेंट कमेटी से हटा दिया गया है. बयान में यह भी कहा गया कि संस्थान में पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी और छात्रों की सुरक्षा सबसे अहम प्राथमिकता है. संस्थान ने आश्वस्त किया कि सभी छात्र सुरक्षित हैं. साथ ही एसआरआईएसआईआईएम और पीठम ने कहा कि वे जांच में पूरी मदद कर रहे हैं ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके.
स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती कौन हैं?
ओडिशा में पार्थ सारथी नाम से जन्मे स्वामी चैतन्यानंद खुद को धार्मिक गुरु बताते हैं. वे दिल्ली के वसंत कुंज स्थित श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट के डायरेक्टर रह चुके हैं और उनका संबंध कर्नाटक के श्रृंगेरी शारदा पीठम से बताया जाता है. वे यह भी दावा करते हैं कि उनका यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो जैसे संस्थानों से शैक्षणिक जुड़ाव रहा है.



