नौ साल बाद चीन से लौटे मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग संग अपनी मुलाकात को ‘जी-2’ करार दिया है। इस दौरे से अमेरिका को 200 बोइंग विमानों की बिक्री और कृषि क्षेत्र में अहम व्यापारिक समझौते हासिल हुए हैं। आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं…
नौ साल के लंबे अंतराल के बाद मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन का ऐतिहासिक दौरा किया है। इस यात्रा से वापस लौटते ही उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी इस अहम मुलाकात को ‘जी-2’ (G-2) का नाम दिया है। अमेरिका के मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज पर उतरने के बाद मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि इस दौरे से अमेरिका को बड़े व्यापारिक फायदे मिले हैं। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने इस बैठक को दुनिया के दो महान देशों के नेताओं का मिलन बताते हुए इसे इतिहास का एक बहुत महत्वपूर्ण क्षण करार दिया। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उनके इस बयान ने चीन को कूटनीतिक रूप से अमेरिका के बिल्कुल बराबर खड़ा कर दिया है, जो कि इस यात्रा में चीन का एक बहुत बड़ा लक्ष्य था।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की यह चीन यात्रा वैश्विक राजनीति और व्यापार के लिहाज से एक बहुत बड़ी घटना है। ट्रंप का विमान अलास्का के एंकरेज में ईंधन भरने के लिए रुका था और उसके बाद उन्होंने अपनी सफलताओं का बखान किया। उन्होंने बताया कि इस दौरे में चीन के साथ 200 बोइंग विमान बेचने का पक्का समझौता हुआ है, जबकि भविष्य में 750 अतिरिक्त विमानों का वादा भी लिया गया है। इसके अलावा, अमेरिकी कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी चीन से मजबूत प्रतिबद्धता हासिल की गई है। अक्तूबर 2025 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद यह पहली बड़ी शीर्ष वार्ता थी, जिसमें आयात शुल्क और रेयर अर्थ मिनरल्स पर पाबंदियों में ढील का सकारात्मक असर साफ दिखा।
शी जिनपिंग ने क्या चेतावनी दी?
इस बहुप्रतीक्षित शिखर वार्ता में शुरुआत से ही ताइवान का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा और तनाव का विषय बना रहा। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ताइवान के मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो अमेरिका-चीन के संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे। दिलचस्प बात यह रही कि अमेरिकी पक्ष ने इस पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि चीन ताइवान पर पूर्ण कब्जा नहीं चाहता, बल्कि वह सिर्फ यह चाहता है कि ताइवान खुद को स्वतंत्र देश घोषित न करे। उन्होंने दावा किया कि उनके राष्ट्रपति पद पर रहते हुए चीन ताइवान पर कोई हमला नहीं करेगा, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उनके जाने के बाद बीजिंग कोई आक्रामक कदम उठा सकता है।
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ताइवान पर हमले की स्थिति में अमेरिका उसकी रक्षा करेगा?
जब पत्रकारों ने मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से यह सीधा सवाल पूछा कि अगर चीन ताइवान पर सैन्य हमला करता है, तो क्या अमेरिका उसकी रक्षा करेगा? इस पर ट्रंप ने कोई भी स्पष्ट जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर फोर्स वन विमान में संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रंप ने खुलासा किया कि यही सवाल खुद शी जिनपिंग ने भी उनसे आमने-सामने की बैठक में पूछा था। ट्रंप ने शी जिनपिंग को जवाब दिया कि वह इन संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करते हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस सवाल का असली जवाब दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति के पास है और वह स्वयं मैं हूं।
दोनों महाशक्तियों के बीच क्या सहमति बनी और आगे की क्या योजना?
ताइवान के बाद इस बैठक का दूसरा सबसे अहम मुद्दा ईरान का संकट रहा, जहां दोनों देशों के बीच बहुत अच्छा तालमेल देखने को मिला। इकॉनमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की विशेषज्ञ यूए सू के अनुसार, ईरान पर चर्चा ने दोनों देशों के साझा हितों को मजबूती से सामने रखा है। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि चीन अमेरिकी तेल खरीदने को तैयार हो गया है और वह ईरान से जुड़ी वार्ताओं में भी अमेरिका की मदद करेगा। हालांकि चीन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस बयान से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी तेजी आ गई। दोनों देशों के बीच इस सकारात्मक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए, ट्रंप ने शी जिनपिंग को 24 सितंबर को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दिया है।



